आबाद रहे वो गाँव मेरा

आबाद रहे वो गाँव मेरा,
जहाँ लटकर जा न सका
वो बेटा क्या,
जो माँ के हाथों से खा न सका।
सीमा पर लड़ते-लड़ते शहीद हो गया
सारा सपना मेरा हवा हो गया।

आबाद रहे वो गाँव मेरा,
जहाँ से गंगा गुजरती है ।
उस गांव के कोने में,
एक कुटिया में मेरी मां रहती हैं
मेरी माँ रहती हैं ।


बहुत मेहनत मे माँ ने पाला, पोसा बड़ा किया
मुझे अपने पैरो पर खड़ा किया ।
माँ ने मेरे सपनों को आबाद कर दिया
पर मैंने अपने आप को बर्बर कर दिया । -
गर्मी की ताप हो,
ठंडे की भड़ास हो।
सभी मौसम में मेरा दिल  धड़कता था।
माँ से मिलने के लिए हमेशा वो तड़पता था ।


विश्वास है मुझे,
गाँव वाले माँ के साथ बैठे होंगे।
जींदा बोल कर मुझे,
 माँ की दिलास दिला रहे होंगे।
माँ किसके भरोसे रहेगी,
दर्द किसको कहेगी ।

मेरे साथियों के अंदर क्रांती जाग चुकी होगी,
सीर्फ मेरे लिए एक बड़ी जंग होगा।
समी आतंकियों को भंग कर दिया जाए,
साथ देने वाले नेताओं को तंग कर दिया जाएगा।

सलाम उस माँ को जिसने मुझे जन्म दिया।
स्वतंत्र रहे देश मेरा,
याद रह सभी को भेष मेरा।