गरीबी - एक जानलेवा रोग
भारत तो आज से 72 वर्ष पहले ही आजाद हो चूका था . और अंग्रेज भी हमें बहुत कुछ सिखा गए .कुछ अच्छा तो कुछ बुरा लेकिन हमने अधिकतर क्या सिखा .हमने बुराई को ज्यादा अपनाया . उनमे से कुछ निम्नलिखित है :भेद-भाव करना ,पैसे को जान से ज्यादा महत्व देना .
गावं में शंकर नाम का एक पान बेचने वाला रहता था .उसे एक कान से सुनाइ नहीं देता था . इसीलिए गावं के लोग उशे बहिर बहिर कहकर चिढाया करते थे .शंकर गरीब आदमी था इशिलिए दवा नहीं करा सकता है .उसके परिवार में पत्नी ,दो बच्चे है. वह पान बेचकर किसी तरह घर चला लेता था .गावं में कोई उसकी इज्जत नहीं करता था .वह किसी काम केलिए घर से निकलता था तो मूह छुपा कर निकलना पड़ता था .क्यू की कोई भी बच्चा उसका मजाक उड़ने लगता था .जोकि शंकर को अच्छा नहीं लगता था .वह जानता है की बच्चे नटखट होते है इसी कारन वह किसी बच्चे को कुछ नहीं कहता था .चुप चाप सुन कर निकल जाता था.सभी की ये आदत देखकर उस गावं को छोड़ जाने का मन करता है .फिर सोचता है जाऊंगा तो जाऊंगा कहाँ .यह सुन सुन कर उसे गुस्सा आ रहा था . दिन पर दिन गुस्सा बढ़ते गया .कुछ दिन बित गए वह पान का दूकान नहीं खोल रहा था . गर्मी में पेड़ के निचे अपने परिवार के साथ बैठा था .अचानक से उसका बड़ा बीटा जो 10 वर्ष का है वो पूछता है "पापा सब कोई आपको बहिर क्यों कहते हैं ".
ये बात शंकर के दिल में लग गई .वह अटका रह गया उसके पास कोई जवाब नहीं था .उसकी आखो से दरिया बहने लगा .बच्चा दुबारा कहता है ;पापा बतोओ न .शंकर बोलता है.मेरा मेरा एक कान ख़राब है और हम गरीब है इसीलिए हमारी कोई इज्जत नहीं करता है .जिसका जो मन करता है बोल देता है .बीटा पिता की बात और उन्हें रोता देख सन्ति से पापा के गोद में बैठ जाता है .
पास के शहर में शंकर का भाई संतोष रहता है.वह गावं कुछ दिन केलिए आया .शंकर की उपजाऊ जमीं देखकर उसे लालच आ जाता है .उसने शहर जा कर नकली कागजाद बनवालिया .कुछ दिन बाद गावं आकर दावा करता है की वो जमीन मेरी है .यह सुन कर शंकर ने कहाँ तुम्हारी जमीं है इसका क्या साबुत है .वह कागजाद निकाल कर दिखा देता है .यह सुन कर शंकर दौड़े दौड़े मुखिया के पास गया .मुखिया ने सारी बाते सुनी और बोला कल सुबह फैसला होगा .तुम अभी जाओ और साबुत की तयारी करो .शंकर चला जाता है .कुछ देर बाद संतोष मुखिया के पास पहुचता है .वह मुखिया से बात कर के वह कुछ रुपयों की गड्डी मुखिया को देदेता है .
मुखिया पैसो की लालच था .सुबह होते ही सभी गावं के लोग पंचायत में पहुचे .मुखिया जी ने उस जमीं को जैसे तैसे करके संतोष को उसका मालिक करार दिया .सभी चले गए .शंकर साम तक वही खड़ा रह जाता है .
वह घर लौट कर अपने परिवार को ये बताया और रोने लगा .तभी बड़ा बीटा आता है और पिता को रोते देख पूछता है क्या हुआ पिता जी .शंकर बोलता है हमारी जमीन हमारी नहीं रही .बीटा फीर बोलता है क्यों वो तो हमारी है.
शंकर बोलता है हम गरीब है .हमारी कौन सुनेगा .यहाँ गरीब की बात कोई नहीं सुनता है .अब शंकर अपने परिवार के साथ दुःख से बैठा है .आज घर में चूल्हा नहीं जला . ऐसा लग रहा था जैसे किसी की मृतु हुई है .चारो तरफ सनाटा था कुछ पता नहीं चल रहा था .कुछ दिनों में शंकर की तबेत ख़राब होने के कारण मौत हो जाता है .अब उस परिवार का कोई सहारा नहीं है ......................................
आज 20 साल बित गए .आज उस जमीन में लोग दर से नहीं जाते है .अगर वो गरीब नहीं होता तो आज उसकी मौत नहीं होती .....................................................
written by :-AMRIT KUMAR
ये बात शंकर के दिल में लग गई .वह अटका रह गया उसके पास कोई जवाब नहीं था .उसकी आखो से दरिया बहने लगा .बच्चा दुबारा कहता है ;पापा बतोओ न .शंकर बोलता है.मेरा मेरा एक कान ख़राब है और हम गरीब है इसीलिए हमारी कोई इज्जत नहीं करता है .जिसका जो मन करता है बोल देता है .बीटा पिता की बात और उन्हें रोता देख सन्ति से पापा के गोद में बैठ जाता है .
पास के शहर में शंकर का भाई संतोष रहता है.वह गावं कुछ दिन केलिए आया .शंकर की उपजाऊ जमीं देखकर उसे लालच आ जाता है .उसने शहर जा कर नकली कागजाद बनवालिया .कुछ दिन बाद गावं आकर दावा करता है की वो जमीन मेरी है .यह सुन कर शंकर ने कहाँ तुम्हारी जमीं है इसका क्या साबुत है .वह कागजाद निकाल कर दिखा देता है .यह सुन कर शंकर दौड़े दौड़े मुखिया के पास गया .मुखिया ने सारी बाते सुनी और बोला कल सुबह फैसला होगा .तुम अभी जाओ और साबुत की तयारी करो .शंकर चला जाता है .कुछ देर बाद संतोष मुखिया के पास पहुचता है .वह मुखिया से बात कर के वह कुछ रुपयों की गड्डी मुखिया को देदेता है .
मुखिया पैसो की लालच था .सुबह होते ही सभी गावं के लोग पंचायत में पहुचे .मुखिया जी ने उस जमीं को जैसे तैसे करके संतोष को उसका मालिक करार दिया .सभी चले गए .शंकर साम तक वही खड़ा रह जाता है .
वह घर लौट कर अपने परिवार को ये बताया और रोने लगा .तभी बड़ा बीटा आता है और पिता को रोते देख पूछता है क्या हुआ पिता जी .शंकर बोलता है हमारी जमीन हमारी नहीं रही .बीटा फीर बोलता है क्यों वो तो हमारी है.
शंकर बोलता है हम गरीब है .हमारी कौन सुनेगा .यहाँ गरीब की बात कोई नहीं सुनता है .अब शंकर अपने परिवार के साथ दुःख से बैठा है .आज घर में चूल्हा नहीं जला . ऐसा लग रहा था जैसे किसी की मृतु हुई है .चारो तरफ सनाटा था कुछ पता नहीं चल रहा था .कुछ दिनों में शंकर की तबेत ख़राब होने के कारण मौत हो जाता है .अब उस परिवार का कोई सहारा नहीं है ......................................
आज 20 साल बित गए .आज उस जमीन में लोग दर से नहीं जाते है .अगर वो गरीब नहीं होता तो आज उसकी मौत नहीं होती .....................................................
written by :-AMRIT KUMAR

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