आज मैं लिखने जा रहा हु. एक छोटी सी कहानी जिसे पढने के बाद आपका देखने का नजरिया बदल जाएगा .


एक बूढ़े फकीर के घर आधी रात को एक चोर घुस आया.फकीर रात के समय कुछ लिख रहा था . ठण्ड का समय था. 
फकीर ने चोर को देखकर कहा -आओ बैठो इतनी रात को कैसे आना हुआ. 
चोर ने कहा -मैं चोर हु चोरी करने के मकसद से आया हु. 
उसकी बात सुन कर फकीर रोने लगा .
चोर ने फुछा -क्या हुआ तुम्हे ? तुम रोने क्यों लगे ?
फकीर ने कहा - मुझे तुम्हारी दशा देखकर दया आ रही है. तुम्हे अपना पेट भरने केलिए क्या क्या करना पड़ता है . इतनी ठण्ड में तुम दूर गावं से आये हो लेकिन मेरे पास कुछ जादा है ही नहीं वही अलमारी में कुछ आठ दस रूपए होंगे . वो तुम लगाओ .
चोर को लगा ये फकीर पागल है. चोर ने पैसे उठाए और जाने लगा .
फकीर ने कहा- अरे सुनते जाओ . कृपया उन पैसो में से एक रुपया छोड़ देना . सुबह मुझे कही दूर काम से जाना है .
चोर ने एक रूपए छोड़े और जाने लगा . 
फकीर ने फिर कहा - रुको ! जाते जाते मुझे धन्यवाद् तो कहो .
चोर ने फकीर को जल्दी में धन्यवाद कहा और वह से चला गया . 
कुछ महीने बाद वो छोर पकड़ा गया.चोर ने उस गावं में हर घर में चोरी की थी. जब आदालत में उसे ले जाया गया तो सबने कहा ये चोर है लेकिन सबने कहा गावं में एक सच्चा फकीर भी है . अगर चोर ने उस घर में भी चोरी की होगी तो सच पता चल जायेगा. अब उस फकीर को आदालत में बुलवाया गया.
फकीर से पूछा गया-क्या इसने आपके घर में भी चोरी की है .
फकीर ने कहा -नहीं ! लेकिन एक बार ये रात के समय आये थे. इन्हें पैसो की जरुरत थी तो मैंने इनकी मदद की थी और बदले में इन्होने मुझे धन्यवाद भी कहा था.
उस फकीर के अवाहिग के बाद उस चोर को छोड़ दिया गया.लेकिन छोर परेसान हुआ की उस फकीर ने सबकुछ जानते हुए भी झूठ क्यों कहा?बाद में चोर फकीर के पास गया और उसने पूछा की मई चोर हु ये जानते हुए भी आपने मुझे क्यों बचाया कौन हो आप ?
फकीर ने मुस्कुराते हुए कहा कि जिस  दिन से मेरे अन्दर के चोर की मौत हुई . उस दिन से मुझे कोई चोर नहीं दिखाई दिया .जिस दिन मेरे घामड़ की मौत हुई उस दिन से मुझे कोई घमंडी नहीं दिखा. जिस दिन मेरे अन्दर के पापी की मौत हुई उस दिन से मुझे कोई पापी नहीं दिखाई दिया. जिस दिन मेरे अन्दर दुःख की मौत हुई उसदिन से बहार मुझे कोई दुःख भी नहीं दिखाई दिया.
सीख :-
जिन्हें लगता है बुरे दुसरो में है तो उन्हें खुद को बदलने की जरुरत है.क्युकी अन्दर से अच्छा इन्सान बुरे लोगो में अच्छाई ढूंड लेता है. और अन्दर से बुरा इन्सान अच्छे इन्सान में भी बुराई ढूंड लेता है . आज की दुनिया कुछ ऐसी ही है . कोई कहे की वो क्रिकेट अच्छा खेलता है . तो दुनिया कहती है - वो क्या क्रिकेट खेलता है .उसे तो मैंने कल शराब पिटे देखा था. जबकि दुनिया को कहना चाहिए कि वो शराब पिता है लेकिन वो एक अच्छा क्रिकेट खेलता है .

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